आरजू (कविता)
आरज़ू दिल की गहराईयों से चाहा है तुम्हें आंख भर आए तो मुस्कान तुम लाना खुशनुमा अहसास था जब छुआ तुम्हें दिल जब हो उदास, वो अहसास तुम लाना.... माना मैं सताती हूँ तुम्हें उम्र हो गई है मेरी तुम हर पल साथ हो ये दिलासा तुम लाना दिल की गहराईयों से चाहा है तुम्हें आंख भर आए तो मुस्कान तुम लाना ..... तेरी खिलखिलाहट जो दिल को हंसाती थी तन्हा लम्हों में वो हँसी तुम लाना बहुत अजीज़ हो मेरे दिल करीब हो यकीन है तुम पर ये भरोसा तुम लाना दिल की गहराईयों से चाहा है तुम्हें आंख भर आए तो मुस्कान तुम लाना..... बहुत खण्डहर सा है मेरा दरीचा धूप आए तो छांव तुम लाना सदियाँ गुज़र गई हैं खिज़ाँ के साये में कहीं मिले तो बहार तुम लाना दिल की गहराईयों से चाहा है तुम्हें आंख भर आए तो मुस्कान तुम लाना ..... हर ख्वाहिश पूरी हो ये जरुरी तो नहीं टूट जाए आस तो हौंसला तुम लाना खौफज़दा हो मंजर, नाकाम हो सफर अन्धेरा हो घना, तो सहर तुम लाना दिल की गहराईयों से चाहा है तुम्हें आंख भर आए तो मुस्कान तुम लाना...... फिस...